विदुथालाई पार्ट 2 रिव्यू: अच्छी शुरुआत, लेकिन अंत में कहानी बिखर गई
विदुडला पार्ट 2एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों को सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों के साथ जोड़ने की कोशिश करती है। फिल्म का पहला भाग जिस इंटेंसिटी और सस्पेंस के साथ खत्म हुआ था, उससे दर्शकों को दूसरे भाग से काफी उम्मीदें थीं। लेकिन क्या ये फिल्म उन उम्मीदों पर खरी उतर पाई?
कहानी की झलक
फिल्म की कहानी सामाजिक अन्याय, पुलिस बर्बरता और नक्सल मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती है। मुख्य किरदार को न्याय और व्यवस्था के खिलाफ खड़े होते दिखाया गया है। जहां कहानी का उद्देश्य गहराई और संवेदनशीलता के साथ समाज की कड़वी सच्चाई को दिखाना है, वहीं पटकथा कहीं-कहीं ढीली पड़ती नजर आती है।
अभिनय और निर्देशन
मुख्य अभिनेता का अभिनय शानदार है। उन्होंने अपने किरदार में गहराई लाने की पूरी कोशिश की है। लेकिन फिल्म का निर्देशन अपनी पकड़ बनाए रखने में असफल रहा। कहानी के कुछ हिस्से बेमतलब खिंचे हुए लगते हैं, जिससे दर्शकों का ध्यान भटकता है।
तकनीकी पक्ष
फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी को मजबूत बनाने की कोशिश करता है, लेकिन यह हर जगह प्रभावी नहीं हो पाता। सिनेमैटोग्राफी अच्छी है, खासकर जंगल और गांव के दृश्यों को बेहतरीन तरीके से फिल्माया गया है। लेकिन कहानी की कमजोरियां इस तकनीकी कुशलता को फीका कर देती हैं।
क्यों देखें?
फिल्म का विषय महत्वपूर्ण है और समाज में सोचने को मजबूर करता है। अगर आपको गंभीर और समाज से जुड़े मुद्दों पर आधारित फिल्में पसंद हैं, तो एक बार देख सकते हैं।
कमियां
फिल्म का दूसरा भाग अपने पहले भाग की तुलना में कमजोर है। कहानी का क्लाइमेक्स निराशाजनक है और कई सवाल अधूरे छोड़ जाता है। पटकथा में कसावट की कमी साफ नजर आती है।
निष्कर्ष
विदुडला पार्ट 2 एक अच्छी सोच के साथ शुरू होती है लेकिन अंत में प्रभाव छोड़ने में विफल रहती है। यह एक ऐसी फिल्म है जो आपको सोचने पर मजबूर तो करती है लेकिन पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाती।
रेटिंग: 2.5/5
अगर आपके पास समय है और आप गंभीर विषयों में रुचि रखते हैं, तो इसे एक बार देख सकते हैं। लेकिन अगर मनोरंजन के लिए देखना चाह रहे हैं, तो आप इसे मिस कर सकते हैं।
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