व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन नियम और कानून
जिम्बाब्वे की नई वॉट्सऐप ग्रुप एडमिन नियमावली: क्या यह डिजिटल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश है?
डिजिटल युग में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म्स ने हमारी बातचीत को तेज़, आसान और सहज बना दिया है। विभिन्न ग्रुप चैट्स के माध्यम से लोग न केवल अपने निजी मित्रों और परिवार से जुड़े रहते हैं, बल्कि सूचनाओं का आदान-प्रदान और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा भी करते हैं। लेकिन जब सरकारें इन प्लेटफ़ॉर्म्स के इस्तेमाल पर नियंत्रण का नियम लागू करती हैं, तो सवाल उठता है कि क्या इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है।
हाल ही में, जिम्बाब्वे की सरकार ने एक ऐसा नियम लागू किया है जो वॉट्सऐप ग्रुप एडमिनिस्ट्रेटर्स के लिए कई चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है। नए नियम के अनुसार, अब सभी वॉट्सऐप ग्रुप एडमिनिस्ट्रेटर्स को देश के पोस्ट और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (POTRAZ) के साथ अपने ग्रुप को रजिस्टर कराना होगा। इस नियम का उद्देश्य भले ही सूचनाओं के आदान-प्रदान को नियंत्रित करना है, पर इससे डिजिटल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति चिंता भी बढ़ गई है।
नियमों की प्रमुख विशेषताएं
1. लाइसेंस अनिवार्यता:
जिम्बाब्वे सरकार के इस नियम के तहत, किसी भी व्यक्ति को वॉट्सऐप ग्रुप एडमिन बनने के लिए POTRAZ के साथ रजिस्टर करना अनिवार्य होगा। साथ ही, उन्हें एक विशेष लाइसेंस प्राप्त करना होगा जो कि एक निश्चित अवधि के लिए मान्य होगा।
2. निगरानी और जिम्मेदारी:
नए नियम में यह प्रावधान है कि अगर किसी ग्रुप में किसी प्रकार की गलत या भ्रामक सूचना साझा की जाती है, तो उसके लिए एडमिन को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इससे एडमिन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें हर संदेश की सटीकता और विश्वसनीयता की पुष्टि करनी होगी।
3. सेंसरशिप का खतरा:
इस नियम का उद्देश्य भले ही गलत सूचना को नियंत्रित करना हो, लेकिन इससे सेंसरशिप की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। अब ग्रुप एडमिन को सावधानी बरतनी होगी कि ग्रुप में कोई ऐसा संदेश न भेजा जाए जो सरकार की नीतियों या विचारधारा के विपरीत हो।
इस नियम के पीछे का कारण
जिम्बाब्वे सरकार का तर्क है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर फैलने वाली अफवाहों, गलत जानकारी और गैरकानूनी गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सके। POTRAZ का कहना है कि लाइसेंसिंग से वे यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि ग्रुप्स का इस्तेमाल गलत उद्देश्यों के लिए न हो।
नियमों के संभावित परिणाम
1. डिजिटल सेंसरशिप में वृद्धि:
यह नियम डिजिटल सेंसरशिप को बढ़ावा दे सकता है। वॉट्सऐप जैसे निजी प्लेटफ़ॉर्म पर सरकार का हस्तक्षेप व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में बाधा डाल सकता है।
2. एडमिन की जिम्मेदारी बढ़ेगी:
एडमिन के लिए यह अनिवार्य हो जाएगा कि वे हर सदस्य द्वारा साझा की गई जानकारी पर नज़र रखें। इससे ग्रुप एडमिन्स पर अतिरिक्त मानसिक दबाव पड़ेगा और वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के डर से ग्रुप्स में अपने विचार व्यक्त करने से बच सकते हैं।
3. भय का वातावरण:
इस तरह की सख्त निगरानी से सामान्य नागरिकों में भय का वातावरण बन सकता है। अगर हर वॉट्सऐप ग्रुप को निगरानी में रखा जाएगा, तो लोग खुलकर चर्चा करने से घबराने लगेंगे।
निष्कर्ष
जिम्बाब्वे का यह नियम सोशल मीडिया पर सरकार का प्रभाव बढ़ाने का एक कदम माना जा सकता है। इस नियम के आने से एक तरफ भले ही गलत सूचनाओं पर नियंत्रण किया जा सकता है, लेकिन दूसरी तरफ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह नियम अन्य देशों को भी प्रभावित कर सकता है और डिजिटल स्वतंत्रता के प्रति एक नई बहस को जन्म दे सकता है।
दुनिया के अन्य देशों को इस प्रकार के नियमों को लागू करने से पहले इसके सामाजिक और कानूनी परिणामों पर विचार करना चाहिए ताकि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स पर लोगों की स्वतंत्रता बनी रहे और अभिव्यक्ति पर कोई प्रतिबंध न हो।
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